‘विदेशी’ घोषित किए गए पूर्व सेना अफसर मोहम्मद सनाउल्लाह को मिली बड़ी राहत

पिछले महीने असम में एक ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित किए गए और हिरासत में लिए गए पूर्व सेना अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को इस मामले में नोटिस भी जारी किया है। राष्ट्रपति पद का पदक जीतने वाले सनाउल्लाह को कामरुप के विदेशी ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी करार दिया गया था।

हालांकि, विदेशी ट्रिब्यूनल के खिलाफ उनकी अपील गुवाहाटी कोर्ट में जारी है. सनाउल्लाह कारगिल वॉर का हिस्सा रहे हैं. भारतीय सेना में वह 30 साल तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इससे पहले कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मोहम्मद सनाउल्लाह के लिए न्याय सुनिश्चित करने का मांग की थी।

गोगोई ने गुरुवार को मीडिया को उपलब्ध कराए गए शाह को लिखे अपने लेटर में उन पुलिस अधिकारियों की कथित अक्षमता की जांच करने का आग्रह किया, जिन्होंने सनाउल्लाह के दस्तावेजों को ‘विदेशी’ बताया था।

राष्ट्रपति पदक से सम्मानित सनाउल्लाह को विदेशी न्यायाधिकरण, कामरूप ने ‘‘विदेशी’’ घोषित किया था जिसके बाद उनका नाम संदेहात्मक मतदाता के रूप में आने के बाद 2008 में एक मामला दर्ज किया गया. न्यायाधिकरण के फैसले के बाद सनाउल्लाह को गोलपाड़ा के एक हिरासत केंद्र में बंद कर दिया गया था।

मोहम्मद सनाउल्लाह और उनके परिवार के सदस्यों के नाम राष्ट्रीय रजिस्टर पंजी (एनआरसी) में नहीं हैं. न्यायाधिकरण ने 23 मई को जारी आदेश में कहा कि सनाउल्लाह 25 मार्च, 1971 की तारीख से पहले भारत से अपने जुड़ाव का सबूत देने में असफल रहे हैं और वह इस बात का भी सबूत देने में असफल रहे कि वह जन्म से ही भारतीय नागरिक हैं. इस वजह से सनाउल्लाह को विदेशी करार दिया गया और हिरासत में लेकर डिटेंशन कैंप भेजा गया।

बता दें, असम में उस रिटायर्ड पुलिसकर्मी के खिलाफ तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गई हैं, जिसने पूर्व सेना अधिकारी सनाउल्लाह को विदेशी घोषित करने वाले दस्तावेजों की पुष्टि की थी. तीन लोगों ने बोको पुलिस थाने में असम सीमा पुलिस के रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर चंद्रामल दास के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थी. इन तीन लोगों के नाम सनाउल्लाह के बयान में गवाह के तौर पर सामने आए थे।